Rajasthan Polity Practice Question and Answer
8 Q: राजस्थान लोकसेवा गारंटी अधिनियम, 2011 के अंतर्गत प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के निर्णय के विरुद्ध कितने दिनों में द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी को अपील की जा सकती है?
712 0640f13a73218fd8d148b9d30
640f13a73218fd8d148b9d30- 115 दिनfalse
- 230 दिनfalse
- 345 दिनfalse
- 460 दिनtrue
- Show Answer
- Workspace
- SingleChoice
Answer : 4. "60 दिन"
Explanation :
1. यह निर्धारित समय सीमा के भीतर और संबंधित मामलों के लिए सार्वजनिक प्राधिकरण द्वारा राज्य के लोगों को कुछ सेवाओं के वितरण के लिए एक अधिनियम है।
2. राजस्थान लोक सेवा गारंटी अधिनियम, 2011 के तहत प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के निर्णय के विरुद्ध 60 दिनों में द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी को अपील की जा सकती है।
Q: राजस्थान के निम्नलिखित में से कौन से संवैधानिक पदाधिकारी राज्यपाल द्वारा नियुक्त किए जाते हैं, लेकिन उन्हें राज्यपाल द्वारा उनके पद से नहीं हटाया जा सकता है-
(i) महाधिवक्ता
(ii) राज्य निर्वाचन आयुक्त
(iii) राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्य
सही विकल्प का चयन कीजिए-
707 06307ba4020c0656a1da1c259
6307ba4020c0656a1da1c259- 1केवल (i) और (ii)false
- 2केवल (ii) और (iii)true
- 3केवल (i) और (iii)false
- 4(i), (ii) और (iii)false
- Show Answer
- Workspace
- SingleChoice
Answer : 2. " केवल (ii) और (iii)"
Q: निम्नलिखित में से कौन सा धन विधेयक के सम्बन्ध में सही नहीं है?
703 062f32d7039a8157d97fb68b8
62f32d7039a8157d97fb68b8- 1राज्यपाल की पूर्व संस्तुति के बाद विधानसभा में प्रस्तुत किया जाता है।false
- 2यह मंत्री के द्वारा पेश किया जाता है।false
- 314 दिन पश्चात् स्वतः पारित हो जाता है।false
- 4विधानसभा का कोई भी सदस्य इसे पेश कर सकता है।true
- Show Answer
- Workspace
- SingleChoice
Answer : 4. "विधानसभा का कोई भी सदस्य इसे पेश कर सकता है। "
Q: बलवन्त राय मेहता समिति थी:
702 0633710f25c208a6bf71c9d7a
633710f25c208a6bf71c9d7a- 1लोकतांत्रिक विकेन्द्रीयकरण परfalse
- 2पंचायती राज संस्थाओं परfalse
- 3ग्रामीण विकास परfalse
- 4सामुदायिक विकास कार्यक्रम परtrue
- Show Answer
- Workspace
- SingleChoice
Answer : 4. "सामुदायिक विकास कार्यक्रम पर"
Explanation :
1. पंचायती राज मंत्रालय भारत सरकार की एक शाखा है जो राज्यों में विकेंद्रीकरण और स्थानीय शासन की चल रही प्रक्रिया की देखभाल करती है।
2. पंचायती राज व्यवस्था ग्रामीण भारत की स्थानीय स्वशासन की प्रणाली है। जिस तरह से नगरपालिकाओं तथा उपनगरपालिकाओं के द्वारा शहरी क्षेत्रों का स्वशासन चलता है, उसी प्रकार पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों का स्वशासन चलता है।
3. पंचायती राज संस्थाएँ तीन स्तरहैं।
(1) ग्राम के स्तर : ग्राम पंचायत
(2) ब्लॉक स्तर : पंचायत समिति
(3) जिला स्तर : जिला परिषद
Q: कमलकांत वर्मा राजस्थान की पहले _______ थे?
689 06305240c20c0656a1d946ae9
6305240c20c0656a1d946ae9- 1मुख्य न्यायाधीशtrue
- 2उपमुख्यमंत्रीfalse
- 3राज्यपालfalse
- 4मुख्यमंत्रीfalse
- Show Answer
- Workspace
- SingleChoice
Answer : 1. "मुख्य न्यायाधीश"
Q: भारत के संविधान में निम्नलिखित में से कौन सा संशोधन पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक दर्जा प्रदान करता है?
685 062f0f77506679c6dabc68c07
62f0f77506679c6dabc68c07- 175वाँ संशोधनfalse
- 273वाँ संशोधनtrue
- 371वाँ संशोधनfalse
- 472वाँ संशोधनfalse
- Show Answer
- Workspace
- SingleChoice
Answer : 2. "73वाँ संशोधन"
Explanation :
1. मूल संविधान में 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा भाग-9 के अंतर्गत पंचायती राज से संबंधित उपबंधों की चर्चा (अनुच्छेद 243) की गई है । भाग-9 में ‘पंचायतें’ नामक शीर्षक के तहत अनुच्छेद 243-243ण (243-243O) तक पंचायती राज से संबंधित उपबंध हैं।
2. भारत में प्रतिवर्ष 24 अप्रैल को लोकतंत्र की नींव के रूप में पंचायती राज दिवस मनाया जाता है।
3. पंचायती राज व्यवस्था, ग्रामीण भारत की स्थानीय स्वशासन की प्रणाली है।
4. पंचायती राज व्यवस्था तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा राजस्थान के
5. नागौर जिले के बगधरी गांव में 2 अक्टूबर 1959 को पंचायती राज व्यवस्था लागू की गई।
7. राजस्थान तथा आन्ध्र प्रदेश राज्यों में स्थानीय सरकार स्वरूप को सर्वप्रथम अंगीकार किया।
8. भारतीय संविधान में पंचायती राज की अवधारणा राज्य नीति के निदेशक तत्वोंनिहित है।
9. पंचायतों का कार्यकाल पाँच वर्ष निर्धारित है लेकिन कार्यकाल से पहले भी इसे भंग किया जा सकता है।
10. पंचायती राज से संबंधित सभी प्रकार की प्रमुख समितियाँ निम्न हैं
- बलवंत राय मेहता समिति (1957)
- अशोक मेहता समिति (1977)
- जी. वी. के राव समिति (1985)
- एल.एम. सिंघवी समिति (1986)
Q: राजस्थान लोक सेवा गारंटी अधिनियम, 2011 को उद्देश्य है-
675 06304aaa229cb463044298ad6
6304aaa229cb463044298ad6- 1पारदर्शिता लानाfalse
- 2शिकायत निवारण तंत्र उपलब्ध करवानाfalse
- 3सेवा प्राप्ति का अधिकार देनाfalse
- 4उपर्युक्त सभीtrue
- Show Answer
- Workspace
- SingleChoice
Answer : 4. "उपर्युक्त सभी"
Explanation :
1. प्रारंभिक अधिनियम में 15 प्रमुख सरकारी विभागों की 108 सेवाओं को शामिल किया गया था, जिसमें सरकारी अधिकारियों द्वारा कर्तव्यों के समयबद्ध प्रदर्शन की परिकल्पना की गई थी और अपराधियों के लिए नकद दंड का प्रावधान था।
2. सुशासन को बढ़ावा देना: इस अधिनियम का उद्देश्य राज्य सरकार को नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण और समय पर लोक सेवाएं प्रदान करने के लिए जवाबदेह बनाना है।
3. नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना: इस अधिनियम का उद्देश्य नागरिकों को उनकी लोक सेवाओं के लिए निर्धारित समय सीमा में और गुणवत्ता के साथ प्राप्त करने का अधिकार प्रदान करना है।
4. सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाना: इस अधिनियम का उद्देश्य सरकारी प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाना है ताकि नागरिकों को उन्हें समझने और उनका पालन करने में आसानी हो।
Q: राजस्थान में संभागीय आयुक्त व्यवस्था को कब पुनर्जीवित किया गया?
675 06311ef6df0d47409ab356efe
6311ef6df0d47409ab356efe- 11977false
- 21985false
- 31987true
- 41989false
- Show Answer
- Workspace
- SingleChoice
Answer : 3. "1987 "
Explanation :
1. 1962 में राजस्थान संभागीय आयुक्त के कार्यालय का उन्मूलन किया गया और 1987 में पुनर्जीवित किया गया।
2. आयुक्तों की भूमिकाएँ और शक्तियाँ एक राज्य से दूसरे राज्य में भिन्न होती हैं लेकिन एक सामान्य पहल है।